एक राजकुमारी का मेवाड़ की राजमाता बनने तक का सफर, जानिए विजयराज कुमारी का इतिहास
विजयराज कुमारी मेवाड़ का जन्म 21 दिसंबर 1942 को कच्छ के शाही परिवार में हुआ था। वे कच्छ के महाराज फतेह सिंहजी की छोटी बेटी और कच्छ के महाराव की पोती थीं। उनका पालन-पोषण राजसी परंपराओं के साथ हुआ और उन्होंने ऊटी के एक फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट से शिक्षा प्राप्त की।
मेवाड़ राजपरिवार में विवाह
वर्ष 1972 में उनका विवाह उदयपुर के शाही परिवार के श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़ से हुआ। विवाह के बाद वे उदयपुर में बस गईं और मेवाड़ की परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक गतिविधियों से गहराई से जुड़ गईं। अरविंद सिंह मेवाड़, मेवाड़ राजपरिवार के 76वें संरक्षक रहे और महाराणा भगवत सिंह मेवाड़ के पुत्र थे। विजयराज कुमारी और अरविंद सिंह मेवाड़ के तीन संतानें—भार्गवी कुमारी मेवाड़, पद्मजा कुमारी और लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ हैं।
शिक्षा और समाजसेवा से जुड़ाव
राजमाता विजयराज कुमारी का विशेष जुड़ाव शिक्षा और सामाजिक सेवा से रहा। वे महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के विकास से 1980 के दशक में जुड़ीं और स्कूल को अधिक व्यवस्थित एवं आधुनिक शैक्षणिक स्वरूप देने में योगदान दिया। शिक्षा को वे समाज के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानती थीं।
धार्मिक एवं आध्यात्मिक जीवन
मेवाड़ के प्राचीन मंदिरों और धार्मिक परंपराओं से भी उनका गहरा जुड़ाव रहा। वे श्री एकलिंगजी ट्रस्ट सहित उन संस्थाओं से जुड़ी रहीं, जो मेवाड़ के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और विकास के लिए कार्य करती हैं। राजपरिवार के धार्मिक एवं पारंपरिक आयोजनों में भी उनकी सक्रिय उपस्थिति रहती थी। वे बिहार स्कूल ऑफ योग से भी जुड़ी रहीं और योग एवं आध्यात्मिक शिक्षा के प्रसार में योगदान देती रहीं।
मेवाड़ की विरासत को आगे बढ़ाने में भूमिका
राजमाता विजयराज कुमारी केवल शाही परिवार की सदस्य के रूप में ही नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, धर्म और सामाजिक सेवा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शख्सियत के रूप में भी जानी जाती रहीं। HRH Group की आधिकारिक प्रोफाइल उन्हें सिटी पैलेस से जुड़े विभिन्न परोपकारी कार्यों के लिए परिवार का मजबूत स्तंभ बताती है। वे Historic Resorts Hotels Pvt. Ltd. की Joint Managing Director भी रहीं।
83 वर्ष की आयु में निधन
उपलब्ध शोक संदेश के अनुसार 14 सितंबर 2026 को 83 वर्ष की आयु में राजमाता विजयराज कुमारी जी का निधन हो गया। उनके निधन के साथ मेवाड़ राजपरिवार ने अपनी एक महत्वपूर्ण सदस्य को खो दिया। उनकी अंतिम यात्रा 15 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे राजमहल, उदयपुर से महासतीजी के लिए रवाना होने की जानकारी शोक संदेश में दी गई है। राजमाता विजयराज कुमारी जी का जीवन मेवाड़ की परंपरा, शिक्षा, आध्यात्मिकता और सेवा से जुड़ा रहा। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए मेवाड़ की विरासत का हिस्सा बना रहेगा।
