17 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास; जगदीश मंदिर में सजेगी नौका विहार झांकी, श्रीनाथजी मंदिर में होंगे छप्पन भोग; 15 जून तक चलेगा कथा, मनोरथ और भगवान विष्णु की आराधना का दौर

May 16, 2026 | priyanshu chouhan | Festivals

राजस्थान सहित पूरे देश में इस वर्ष ज्येष्ठ मास विशेष धार्मिक संयोग लेकर आ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार ज्येष्ठ मास दो माह तक रहेगा, क्योंकि इसके बीच में अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास का संयोग बन रहा है। अधिक मास 17 मई से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह माह भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान जप-तप, दान-पुण्य, कथा-कीर्तन और सात्विक जीवन का विशेष महत्व माना जाता है। शहर के मंदिरों और वैष्णव संप्रदायों में इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब इस अतिरिक्त मास को कोई भी देवता अपना अधिपत्य देने को तैयार नहीं हुआ, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना श्रेष्ठ नाम “पुरुषोत्तम” प्रदान किया। तभी से यह मास पुरुषोत्तम मास के नाम से प्रसिद्ध हुआ और इसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाने लगा। धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस माह में भगवान विष्णु की उपासना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि अधिक मास को आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का विशेष काल माना जाता है।


ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, चंद्र वर्ष लगभग 354 से 355 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 से 366 दिनों का माना जाता है। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष 2 मई से 16 मई तक रहेगा। इसके बाद 17 मई से 15 जून तक अधिक मास चलेगा और फिर 16 जून से 29 जून तक ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष रहेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में भगवान पुरुषोत्तम यानी श्रीहरि विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दौरान भागवत पुराण, श्रीमद्भगवद्गीता और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही दीपदान, अन्नदान, वस्त्रदान, जलदान तथा कांसे के पात्र में घी या स्वर्ण दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है। ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी को देखते हुए राहगीरों, पशु-पक्षियों और जरूरतमंदों के लिए शीतल जल की व्यवस्था करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना गया है।

पंडितों के अनुसार, अधिक मास केवल बाहरी पूजा-पाठ का समय नहीं है, बल्कि यह मन, वाणी और शरीर की शुद्धि का भी अवसर होता है। इस दौरान श्रद्धालु तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज, मांसाहार और मदिरा का त्याग कर सात्विक जीवन अपनाते हैं। अधिक मास के नियमों का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, आत्मसंयम और सकारात्मक परिवर्तन लाना माना गया है।

अधिक मास के कारण इस वर्ष कई प्रमुख त्योहारों की तिथियों में भी बदलाव देखने को मिलेगा। रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त को मनाया जाएगा, जबकि दीपावली 8 नवंबर को आएगी। धार्मिक आयोजनों और पर्वों की नई तिथियों को लेकर मंदिरों और श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।

उदयपुर शहर के प्रमुख मंदिरों में भी पुरुषोत्तम मास को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। शहर के आराध्य देव जगदीश मंदिर में पूरे माह भगवान पुरुषोत्तम की कथा का वाचन होगा। शाम के समय फूल बंगला, नौका विहार, हिंडोला और झूला झांकी जैसे विशेष मनोरथ आयोजित किए जाएंगे। मंदिर पुजारी परिवार और विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा भजन-कीर्तन एवं सत्संग कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। मंदिर में पुरुषोत्तम मास को लेकर तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं। मंदिर परिसर में विशेष सजावट की गई है। श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिर को जगह-जगह आकर्षक विद्युत रोशनी और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। शाम के समय जगमगाती रोशनी के बीच मंदिर का दृश्य भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

वहीं श्रीनाथजी मंदिर में भी अधिक मास के दौरान भव्य धार्मिक आयोजन होंगे। यहां साहिबान और कदम की मंडली, नंद महोत्सव, चीर हरण मनोरथ, कमल तलई, रंग महल, फूलों के हिंडोले और छप्पन भोग जैसे राजसी मनोरथ सजाए जाएंगे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन भी विशेष व्यवस्थाओं में जुट गया है।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि पुरुषोत्तम मास आत्मचिंतन, सेवा, संयम और भक्ति का अनुपम अवसर होता है। मान्यता है कि इस माह में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और सेवा कार्यों से जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।