राजस्थान निकाय चुनाव का बिगुल बजा: 2 चरणों में होगी वोटिंग, 14 सितंबर को आएंगे नतीजे; आचार संहिता लागू!
राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। प्रदेश के 309 शहरी निकायों में चुनाव होंगे, जिनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं। कुल 10,245 पार्षद पदों पर चुनाव होना है।
क्या है चुनाव प्रक्रिया?
पहले पार्षदों के चुनाव होंगे। इसके बाद मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्षों का चुनाव कराया जाएगा।
आचार संहिता के बाद क्या बदलेगा?
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही सभी 309 निकायों में आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद:
- नए विकास कार्यों की घोषणा नहीं होगी।
- नए वर्क ऑर्डर जारी नहीं किए जा सकेंगे।
- पहले से चल रहे काम जारी रहेंगे।
- मंत्री और नेता चुनाव प्रचार में सरकारी वाहनों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
309 निकायों में चुनावी हलचल के साथ अब प्रदेश का सियासी माहौल भी गर्म होने वाला है।
चुनाव से जुड़े मुख्य आंकड़े
कुल शहरी निकाय: 309 — 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं।
कुल पार्षद पद: 10,245 पदों पर पहले चरण में मतदान होगा।
चुनाव का क्रम: पहले पार्षदों के चुनाव होंगे, जिसके बाद मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष चुने जाएंगे।
पदों पर आरक्षण की स्थिति
OBC आरक्षण: 309 निकायों में से 60 प्रमुख पद ओबीसी के लिए आरक्षित हैं।
SC/ST आरक्षण: 50 पद अनुसूचित जाति (SC) और 11 पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
महिला आरक्षण: कुल 10,245 पार्षद पदों में से 3,356 पर महिलाएं चुनी जाएंगी। हर कैटेगरी में महिलाओं के लिए 33% वार्ड आरक्षित हैं।
अनारक्षित (ओपन) सीटें: 4,120 वार्ड सामान्य या ओपन कैटेगरी के लिए हैं।
आचार संहिता के तहत इन कामों पर रहेगी रोक
सरकारी गाड़ी पर रोक: मंत्री और नेता चुनाव प्रचार के लिए सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
सरकारी गेस्ट हाउस का उपयोग: चुनाव प्रचार के लिए जाने पर मंत्री सरकारी गेस्ट हाउस (विश्राम गृह) में नहीं ठहर पाएंगे।
नई घोषणाएं और

आरक्षण प्रतिशत (Reservation Percentages)

मुख्य समाचार विवरण (Key News Points)
निकाय चुनाव: हाईकोर्ट के आदेश के पालन में शहरी निकाय और पंचायत चुनाव कराए जा रहे हैं।
लॉटरी प्रक्रिया: वार्डों और निकाय प्रमुखों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर डेटा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजा गया है।
प्रभावित कार्य: आचार संहिता लागू होने के कारण विधानसभा सत्र या सरकारी स्तर पर महत्वपूर्ण बिल और फैसले, जैसे यूसीबीआई बिल या अन्य स्थानीय संरक्षण मुद्दे, फिलहाल अटक सकते हैं।
