100 रुपये से शुरू हुई ‘मन्नत वाले राजा’ की कहानी, आज 3.75 लाख की प्रतिमा और 1.55 करोड़ की आंगी
उदयपुर। शहर के धानमंडी क्षेत्र में गणपति महोत्सव ने पिछले 23 वर्षों में एक छोटी-सी शुरुआत से लेकर भव्य आयोजन तक का सफर तय किया है। ‘मन्नत वाले राजा’ के नाम से प्रसिद्ध यह गणपति महोत्सव इस बार भी अपनी विशाल प्रतिमा, भव्य सजावट और वर्षों पुरानी परंपरा के चलते खास चर्चा में है। आयोजकों के अनुसार, इस महोत्सव की शुरुआत करीब चार-पांच सदस्यों ने की थी। उस समय गणपति की प्रतिमा महज 100 रुपये में लाई जाती थी और प्रतिमा का आकार लगभग एक फीट था। आज यही प्रतिमा करीब 20 फीट तक पहुंच चुकी है और इसकी लागत बढ़कर लगभग 3.75 लाख रुपये हो गई है।
100 रुपये की प्रतिमा से 3.75 लाख तक का सफरशुरुआती वर्षों में छोटा आयोजन होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ती गई। आज इस आयोजन से युवा, महिलाएं और बच्चे समेत करीब 50 सदस्य जुड़े हुए हैं। हर साल गणपति महोत्सव के दौरान प्रतिमा को विशेष रूप से सजाया जाता है और करीब 10 दिनों तक अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 1.55 करोड़ की आभूषणों वाली खास पहचान,मन्नत वाले राजा’ की सबसे खास पहचान उनकी भव्य नोटों की आंगी भी रही है। आयोजकों के मुताबिक इसकी शुरुआत करीब 5 लाख रुपये से हुई थी, जो अब बढ़कर लगभग 1.55 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। महोत्सव के दौरान हर दिन बप्पा को अलग-अलग आभूषण और वस्त्र धारण करवाए जाते हैं।
आखिर क्यों पड़ा ‘मन्नत वाले राजा’ नाम? आयोजकों के अनुसार, पहले बप्पा की प्रतिमा उदयपुर के रेती स्टैंड से लाई जाती थी। कुछ वर्षों तक अहमदाबाद से प्रतिमा लाई गई। पिछले चार वर्षों से गणपति की प्रतिमा मुंबई स्थित पाटल के कारखाने से लाई जा रही है। मान्यता है कि बप्पा के दरबार में मांगी गई मन्नत पूरी होती है। इसी आस्था के चलते भक्तों ने गणपति को ‘मन्नत वाले राजा’ नाम दिया, जो अब इस आयोजन की खास पहचान बन चुका है।
विसर्जन पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा गणपति महोत्सव के समापन पर धानमंडी क्षेत्र से भव्य विसर्जन शोभायात्रा निकाली जाएगी। आयोजकों के अनुसार करीब 50 सदस्य शोभायात्रा की व्यवस्थाओं में शामिल रहेंगे। शोभायात्रा में विभिन्न मार्गों से होते हुए गणपति घाट तक पहुंचने की तैयारी है।
आज होगा कवि सम्मेलन गणपति महोत्सव के तहत मंगलवार रात 8 बजे सूरजपोल चौराहे पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें देशभर से कवि शामिल होकर अपनी प्रस्तुतियां देंगे। चार सदस्यों से शुरू हुआ यह सफर आज 50 सदस्यों तक पहुंच चुका है और 100 रुपये की छोटी-सी प्रतिमा अब लाखों रुपये की भव्य प्रतिमा बन चुकी है। यही आस्था, परंपरा और बढ़ते विश्वास की कहानी ‘मन्नत वाले राजा’ को उदयपुर के खास गणपति आयोजनों में शामिल करती है।
