127 साल पुराना हरियाली अमावस्या मेला, जहां महिलाओं की होती है स्पेशल इंट्री, रानी चावड़ी से जुड़ा है इतिहास

August 11, 2026 | desk | Cultural

Hariyali Amavasya Mela: उदयपुर में हर साल सावन की अमावस्या पर लगने वाला हरियाली अमावस्या मेला उत्सव के कहीं बढ़कर है. उदयपुर की महिलाओं के सम्मान में इसकी शुरुआत 1898 में महाराणा फतेह सिंह और रानी चावड़ी ने शुरू की थी. आइये जानते हैं इसकी कहानी…

उदयपुर में हर साल सावन की अमावस्या पर लगने वाला हरियाली अमावस्या मेला सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और परंपरा का प्रतीक है. इस मेले की शुरुआत साल 1898 में हुई थी और तब से यह परंपरा लगातार 127 सालों से निभाई जा रही है.

कैसे हुई मेले की शुरुआत?

इतिहासकार श्री कृष्ण जुगनू के अनुसार, यह मेला उस समय शुरू हुआ जब मेवाड़ के शासक महाराणा फतेह सिंह अपनी रानी चावड़ी के साथ फतेहसागर झील की सैर पर गए थे. वह दिन हरियाली अमावस्या का था और झील पानी से भरी हुई थी. झील की सुंदरता देखकर महाराणा और रानी बहुत खुश हुए. इस खुशी को शहर के लोगों के साथ बांटने के लिए, महाराणा ने झील के किनारे मेला लगाने का फैसला किया.

महिलाओं के लिए खास दिन कैसे शुरू हुआ?

मेले की योजना बनाते समय, रानी चावड़ी ने महाराणा से एक खास बात कही. उन्होंने सुझाव दिया कि मेले का एक दिन सिर्फ महिलाओं के लिए होना चाहिए, ताकि महिलाएं भी खुलकर उत्सव में शामिल हो सकें. महाराणा ने रानी की बात मान ली और तभी से यह परंपरा शुरू हुई कि पहला दिन सभी के लिए होगा. दूसरे दिन यह मेला सिर्फ महिलाओं के लिए होगा. यह परंपरा आज भी निभाई जा रही है.