बछ बारस पर माताओं ने गाय-बछड़े की पूजा कर पुत्र की दीर्घायु व सुख-समृद्धि की कामना की
उदयपुर। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर मंगलवार को शहर में वत्स द्वादशी यानी बछ बारस का पर्व श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने व्रत रखकर बछड़े वाली गाय की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने गौमाता और बछड़े को तिलक लगाकर उनकी पूजा की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की। विशेष रूप से माताओं ने अपने पुत्रों की लंबी आयु, स्वस्थ जीवन और मंगलमय भविष्य के लिए व्रत रखा।
पूजन के दौरान महिलाओं ने गाय और बछड़े को कुमकुम का तिलक लगाया तथा उन्हें हरा चारा एवं पारंपरिक रूप से निर्धारित सामग्री अर्पित की। पूजा के बाद महिलाओं ने मंदिर की परिक्रमा की और वत्स द्वादशी की कथा का श्रवण किया। कई स्थानों पर महिलाओं ने समूह में पूजा-अर्चना कर पर्व की धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया। व्रत-पूजन के पश्चात माताओं ने अपने पुत्रों को तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया। उन्हें आशीर्वाद स्वरूप नारियल का गोला और भेंट राशि भी प्रदान की गई। इस दौरान महिलाओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। घरों में भी वत्स द्वादशी के अनुरूप पारंपरिक पकवान तैयार किए गए और परिवार के सदस्यों ने पर्व की परंपराओं में सहभागिता निभाई।
गौमाता की पूजा से सुख-समृद्धि की मान्यता धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बछ बारस के दिन गाय और बछड़े की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक गौमाता और बछड़े का पूजन करने से भगवान श्रीकृष्ण सहित गौमाता में निवास करने वाले देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इससे परिवार में सुख-शांति, खुशहाली और संपन्नता बनी रहती है। इसी आस्था के चलते महिलाओं ने व्रत रखकर गौसेवा और पूजन किया तथा अपने परिवार और संतान के मंगल की कामना की।




