उदयपुर में गणेश उत्सव की धूम: बप्पा के स्वागत के लिए सजने लगा शहर, जानिए कहां-कहां विराजेंगे गणपति

September 7, 2026 | desk | Culture

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर एक बार फिर गणपति बप्पा के स्वागत के लिए तैयार है। गणेश चतुर्थी के साथ शहर में भक्ति, उत्साह और रंगों से भरे गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। घरों से लेकर बड़े पंडालों तक बप्पा की स्थापना की जाएगी और कई दिनों तक पूजा-अर्चना, आरती, भजन, प्रसाद और सांस्कृतिक आयोजनों का दौर चलेगा। इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी, जबकि गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन के साथ होगा। अलग-अलग रूपों में होगा बप्पा का आगमन उदयपुर में गणेश उत्सव की सबसे खास बात है कि बप्पा का स्वागत सिर्फ एक तरीके से नहीं, बल्कि अलग-अलग अंदाज में किया जाता है। कहीं ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ गणेश प्रतिमा को घर लाया जाता है, तो कहीं युवा और बच्चे मिलकर छोटी-बड़ी झांकियों के साथ बप्पा की अगवानी करते हैं। कई परिवार घर में मिट्टी या पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमा स्थापित करना पसंद करते हैं।

घर-घर में विराजेंगे गणपति गणेश चतुर्थी पर शहर के कई घरों में परिवार मिलकर गणपति की स्थापना करते हैं। बप्पा को मोदक, लड्डू और अन्य प्रसाद का भोग लगाया जाता है। पूजा के दौरान दुर्वा, फूल और विशेष आरती का महत्व रहता है। कई परिवार एक दिन से लेकर कई दिनों तक गणपति को अपने घर में विराजमान रखते हैं और इसके बाद श्रद्धा के साथ विसर्जन करते हैं।

उदयपुर का सबसे खास गणेश उत्सव — बोहरा गणेश जी अगर उदयपुर में गणेश चतुर्थी की बात हो और बोहरा गणेश जी का नाम न आए, ऐसा संभव नहीं है।

Bohra Ganeshji Temple उदयपुर के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन गणेश मंदिरों में से एक है। मंदिर को करीब 360 वर्ष पुराना बताया जाता है। यहां भगवान गणेश की नृत्य मुद्रा वाली प्रतिमा विराजमान है और स्थानीय लोगों में मंदिर के प्रति विशेष आस्था है। मान्यता है कि उदयपुर में किसी नए शुभ कार्य, कारोबार, वाहन खरीद या विवाह जैसे मांगलिक कार्य से पहले बोहरा गणेश जी को पहला निमंत्रण दिया जाता है।

गणेश चतुर्थी पर यहां क्या होता है गणेश चतुर्थी के दिन बोहरा गणेश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तों की भीड़ और धार्मिक उत्साह से भर जाता है। इस अवसर पर यहां बड़े मेले का आयोजन भी होता रहा है। यानी अगर आप उदयपुर में गणेश चतुर्थी का असली माहौल देखना चाहते हैं, तो बोहरा गणेश जी के दर्शन इस उत्सव का सबसे खास अनुभव हो सकते हैं।

उदयपुर में प्रसिद्ध गणेश मंदिर कौन-कौन से हैं? बोहरा गणेश जी के अलावा शहर में कई ऐसे गणेश मंदिर हैं, जहां स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।

1. बोहरा गणेश जी उदयपुर का सबसे प्रसिद्ध गणेश मंदिर और गणेश चतुर्थी के दौरान प्रमुख धार्मिक केंद्र। यहां की नृत्य मुद्रा वाली गणेश प्रतिमा और लंबे समय से चली आ रही आस्था इसे खास बनाती है।

2. जाड़ा गणेश जी चांदपोल के बाहर ब्रह्मपोल क्षेत्र में स्थित जाड़ा गणेश जी भी शहर के स्थानीय धार्मिक स्थलों में शामिल हैं।

3. दूधिया गणेश जी उदयपुर के प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में दूधिया गणेश जी का भी विशेष स्थान माना जाता है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। बप्पा के दर्शन, विशेष पूजा-अर्चना और आरती के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

4. पाला गणेश जी पिछोला क्षेत्र में स्थित पाला गणेश जी का मंदिर भी उदयपुर के गणेश मंदिरों में शामिल है।

सिर्फ पूजा नहीं, शहर की संस्कृति भी बनेगा हिस्सा

उदयपुर में गणेश उत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहता। गणपति पंडालों में सजावट, रोशनी, भजन-संध्या, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक आरती जैसे आयोजन शहर के माहौल को उत्सव में बदल देते हैं। युवा वर्ग के लिए यह उत्सव सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी अवसर बनता है। कई जगहों पर स्थानीय कलाकारों और युवाओं की भागीदारी से गणेश पंडालों को अलग-अलग थीम में सजाया जाता है।

इस बार इको-फ्रेंडली गणेश पर भी रहेगा जोर

गणेश उत्सव के साथ पर्यावरण को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है। मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री से बनी गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, ताकि विसर्जन के बाद जलस्रोतों पर कम से कम पर्यावरणीय प्रभाव पड़े। 2026 में भी देशभर में इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं को लेकर जागरूकता पर जोर दिया जा रहा है। उदयपुर जैसे झीलों के शहर में यह पहल और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए बप्पा को घर लाने के साथ-साथ उनकी विदाई भी पर्यावरण का ध्यान रखते हुए करना गणेश भक्ति का एक खूबसूरत संदेश बन सकता है।

बप्पा आएंगे तो उदयपुर भी झूमेगा गणेश चतुर्थी सिर्फ भगवान गणेश की स्थापना का पर्व नहीं, बल्कि नई शुरुआत, सुख-समृद्धि और विघ्नों को दूर करने की आस्था का उत्सव है। उदयपुर में इस पर्व की खूबसूरती यही है कि यहां गणपति का स्वागत घर की छोटी-सी पूजा से लेकर भव्य पंडालों और प्राचीन मंदिरों तक, अलग-अलग रंगों में दिखाई देता है।

अब इंतजार है उस पल का जब शहर की गलियों में गूंजेगा— “गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया!” और झीलों की नगरी एक बार फिर भक्ति और उत्सव के रंग में रंग जाएगी।