आषाढ़ी बीज 16 जुलाई को: 58 खंडों को जोड़कर आकर लेगा ठाकुर जी का रजत रथ, कारीगर रोज 6-6 घंटे सवार रहे; भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा की तैयारियाँ ने पकड़ा जोर
16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा, 95 किलो चांदी के रजत रथ की तैयारियां अंतिम चरण में
उदयपुर। लेकसिटी उदयपुर एक बार फिर भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक एवं भव्य रथ यात्रा का साक्षी बनने जा रही है। आगामी 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ रजत रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे और हजारों श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी शहर में रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर प्रशासन, रथ समिति तथा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सेवा संगठन तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
95 किलो चांदी से निर्मित रजत रथ को दिया जा रहा अंतिम रूप
भगवान जगदीश की रथ यात्रा में उपयोग होने वाले करीब 95 किलो चांदी से निर्मित रजत रथ की इन दिनों विशेष साफ-सफाई, पॉलिशिंग, रंग-रोगन और रखरखाव का कार्य किया जा रहा है। पिछले लगभग 15 दिनों से कारीगर पूरी मेहनत और बारीकी के साथ रथ को आकर्षक स्वरूप देने में लगे हुए हैं, ताकि यात्रा के दिन श्रद्धालुओं को इसकी भव्यता का दिव्य दर्शन हो सके।
21 फीट ऊंचा और 17 फीट लंबा है रजत रथ
रथ समिति के सदस्य कमल चौहान ने बताया कि रजत रथ करीब 21 फीट ऊंचा और 17 फीट लंबा है। यह रथ कुल 58 अलग-अलग हिस्सों से मिलकर बना है। यात्रा से चार से पांच दिन पहले सभी भागों को जगदीश चौक परिसर में लाकर सावधानीपूर्वक जोड़ा जाएगा। रथ के पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद उसकी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी अंतिम जांच भी की जाएगी, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या बाधा उत्पन्न न हो।

धार्मिक आयोजनों और सेवा कार्यों की भी व्यापक तैयारियां
रथ यात्रा को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए शहर के अनेक सामाजिक, धार्मिक और सेवा संगठन सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। धर्म उत्सव समिति की ओर से यात्रा के दौरान विशेष धार्मिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और स्वागत समारोह आयोजित किए जाएंगे। वहीं मंदिर प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधा तथा संपूर्ण आयोजन को लेकर प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर तैयारियों में जुटा हुआ है।
यात्रा मार्ग पर लगेंगे सेवा शिविर
रथ यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत, प्रसाद, फल एवं अन्य सेवा शिविर लगाए जाएंगे। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक व्यवस्था संभालेंगे और श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के रथ यात्रा में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
उदयपुर की सांस्कृतिक पहचान है भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
उदयपुर की भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को देश की तीसरी सबसे बड़ी रथ यात्रा माना जाता है। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। पूरे वर्ष श्रद्धालु इस पावन अवसर का इंतजार करते हैं। जैसे ही भगवान जगन्नाथ रजत रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं, पूरा शहर भक्ति के रंग में रंग जाता है। जयघोष, भजन-कीर्तन, पुष्पवर्षा और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के बीच निकलने वाली यह यात्रा उदयपुर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का एक प्रमुख उत्सव बन चुकी है।

इस वर्ष भी रथ यात्रा के दौरान शहरभर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिलेगा और श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के दिव्य दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
